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गुरुवार, 27 जनवरी 2011

जाने कितनी छवियों से : गीत : नागेश पांडेय संजय



3 टिप्‍पणियां:

भावों की माला गूँथ सकें,
वह कला कहाँ !
वह ज्ञान कहाँ !
व्यक्तित्व आपका है विराट्,
कर सकते हम
सम्मान कहाँ।
उर के उदगारों का पराग,
जैसा है-जो है
अर्पित है।